मोदी विरोधी ताकतों का पलड़ा भारी! ऐसा क्यों?

मोदी विरोधी ताकतों का पूर्णकालीन व्यवसाय है नरेंद्र मोदी को किसी भी तरह किसी भी मामले में उलझाना। संसद न चलने देने से लेकर कठुआ औऱ उन्नाव की मानवीय कलंक जैसे जघन्य अपराधों पर भी राजनीति में मोदी को उलझाए रखने में ये घोर मोदी विरोधी ताकतें सफ़ल होती दिखाई दे रही हैं।

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कांग्रेस का ये कैसा उपवास है? क्या जनता का उपहास है?

सारा देश ये पूछ रहा है, कांग्रेस का ये कैसा उपवास है? दलितों पर अत्याचार के विरोध में कांग्रेस ने देशभर में प्रतिक उपवास पर बैठने का ऐलान किया था। नई दिल्ली में राहुल गांधी खुद राजघाट पर उपवास पर बैठने वाले थे। ठीक उपवास पर बैठने के वक़्त, राहुल गांधी के साथ उपवास पर बैठने वाले अरविंदर सिंह लवली औऱ हारून यूसुफ़ समेत मंच पर विराजमान कुछ कांग्रेसी नेताओं की छोले भटूरे खाते वक़्त ली गई तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। अब कांग्रेस इस बात को लेकर विवादों में घिर गई है।

शरद जोशी की जादू की सरकार – बहुत साल पहले काँग्रेस पर लिखी शरद जोशी की अद्भुत व्यंग्य रचना जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं:

Sharad Joshi was a Hindi poet, writer, satirist and a dialogue and scriptwriter in Hindi films and television. He was awarded the Padma Shri in 1990. 

ममता बनर्जी क्यों खफ़ा है नरेंद्र मोदी से? किस वजह से वह अलग हुई थी भाजपाई नेतृत्व वाली NDA सरकार से?

ममता बनर्जी ने NDA के खिलाफ नरेंद्र मोदी को कड़ी चुनौती देने के लिए हाल ही में NDA से अलग हुए चंद्रबाबू नायडू औऱ शिवसेना को साथ लेकर दिल्ली में तिसरे मोर्चे के गठन की तैयारियां शुरू कर दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि छोटी बड़ी प्रादेशिक पार्टियां अपनी अपनी सोच को किनारे रखकर ममता बनर्जी की कितनी सहायता कर सकेंगी। हालांकि भारत में तीसरा मोर्चा हमेशा से ही नाक़ाम रहा है। लेकिन २०१९ के चुनाव हर हाल में अलग औऱ अपने आप में अनूठे होंगे ऐसा जान पड़ता है।

डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर, बाबासाहेब आंबेडकर अबसे अपने पूरे नाम से जाने जाएंगे।

बाबासाहेब आंबेडकर के नाम पर सत्ताधारी दल औऱ विरोधी दलों के बीच जमकर कर राजनीति हो रही है। उत्तरप्रदेश सरकार ने उनके पूरे नाम डॉ भीमराव रामजी आंबेडकर को अबसे सरकारी फाइलों में दर्ज करने का आदेश पारित किया है।

नरेंद्र मोदी २०१९ में तो सरकार बनाएंगे ही। २०२४ में भी वही भारत के प्रधानमंत्री होंगे।

नरेंद्र मोदी के घोर विरोधियों की चीखपुकार के बावजूद हररोज होने वाले सर्वे यह भविष्यवाणी करते दिखाई दे रहे हैं, की मोदी २०१९ तो आसानी से जीत लेंगे ही। २०२४ में भी उनकी सरकार इन सर्वेक्षणों में बनती दिखाई दे रही है।