मोदी विरोधी ताकतों का पलड़ा भारी! ऐसा क्यों?

मोदी विरोधी ताकतें २००० के शुरुआती दिनों से ही उभरने लगी थी।

जैसे ही गुजरात में “सबका साथ, सबका विकास” नारा गूंजने लगा, मोदी विरोधी ताकतों ने एकजुट होना शुरू कर दिया था।ये वो दौर था जब नरेंद्र मोदी नए नए गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे। गुजरात में विकास की दौड़ शुरू होना अभी बाकी था।

२६ जनवरी, २००० के दिन, जब भारी विनाशकारी भूकंप ने कच्छ जिले में सर्वनाश फैला दिया था। एवं अहमदाबाद समेत गुजरात के कई इलाकों को भारी जानमाल का नुकसान पहुंचा दिया था। उस समय, मोदी सरकार की सूझबूझ से, औऱ गुजरात की जनता की हिम्मत, मेहनत औऱ लगन से, बहुत कम समय में गुजरात संवर ही नहीं गया। बल्कि विकास की पटरी पर तेज़ रफ़्तार से दौड़ने भी लगा।

गुजरात में सबके साथ से सबका विकास करने का मोदी सरकार का सपना रंग लाने लगा था। विकास के गुजरात मॉडल की पूरे विश्वमें चर्चा होने लगी थी। गुजरात का विकास देश की नजरों में भी आ रहा था। ऐसे में दूसरे राज्यों के लोग गुजरातमें जब भी आते, गुजरात की सड़कों औऱ बिजली, पानी जैसी सुविधाओं को सराहते। औऱ अपने साथ गुजरात के विकास की कहानियों को अपने राज्यों में बखानते।

धीरे धीरे गुजरात एक आदर्श राज्य बनता जा रहा था। औऱ बेशक़, मोदी सरकार इसके लिए काफ़ी कुछ काम कर भी रही थी। मोदी विरोधी ताकतों को यह सब बहुत खल रहा था।

औऱ फ़िर हुआ गोधराकांड! मोदी विरोधी ताकतों को मिला नवजीवन।

भूकंप के बाद शुरू हुई विकास की दौड़ को गोधराकांड ने ज़बरदस्त ब्रेक लगा दी। साथ ही नरेंद्र मोदी को पूरे विश्व में मुसलमानों का दुश्मन बताकर विलेन बना दिया। यहां तक नरेंद्र मोदी अवांछित हो गए, की भारत गणराज्य के गुजरात जैसे महत्वपूर्ण राज्य के निर्वाचित मुख्यमंत्री होने के बावजूद अमेरिका ने उनके वीज़ा कि अर्जी खारिज कर दी। इससे ज्यादा अपमान किसी राजद्वारी का हो नहीं सकता।

मोदी विरोधी ताकतें इतनी मजबूत थी कि अटल बिहारी वाजपेयी तक को नरेंद्र मोदी को राजधर्म निभाने की नसीहत देनी पड़ी। गोधराकांड पर ख़ूब राजनीति हुई। बहुत भारी पड़ी मोदी विरोधी ताकतें नरेंद्र मोदी पर। लेकिन नरेंद्र मोदी भी कुशल राजनीतिज्ञ की तरह अपनी नीतियों के जरिए, औऱ गुजरात को चमकाते हुए सिर्फ़ अपने विज़न पर काम करते रहे।

फ़िर चला दौर आतंकियों के एनकाउंटर का। नरेंद्र मोदी, अमीत शाह औऱ गुजरात पुलिस के कई आला अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ती गई। उपरसे, गोधराकांड में मोदी के मंत्री का जेल जाना औऱ सजा पाना, औऱ ऐसे कई मामलों का एक साथ उजागर होना, मोदी सरकार को भारी मुसीबत में डालता रहा।

मोदी विरोधी चिल्लाते रहे। औऱ गुजरात की जनता मोदी को बारबार चुनती रही।

मोदी विरोधी ताकतें एकजुट होकर २०१९ के चुनावों में नरेंद्र मोदी को उखाड़ फेंकने की एक मामूली ऑपर्च्युनिटी भी नहीं चूकना चाहते। आए दिन किसी न किसी तरह उनको उलझाने का मौका उन्हें मिल ही जाता है।
मोदी विरोधी ताकतों को २००० के गुजरात भूकंप के समय से २०१८ के कठुआ औऱ उन्नाव के जघन्य अपराधों तक हर मामलों में नरेंद्र मोदी के ऊपर हमला करते देखा गया है।

ढ़ेर सारी मुसीबतों औऱ पूरी दुनिया नरेंद्र मोदी के खिलाफ होते हुए भी, उनके शासन में गुजरात के विकास का कुछ ऐसा जादू चला की नरेंद्र मोदी को गुजरात में एंटी इनकम्बेंसी क्या होती है इसका कभी पता ही नहीं चला। चुनाव होते गए, औऱ नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बनते गए। लगातार चार बार भाजपा को शासन में लाने के बाद उनकी अगली मंज़िल थी नई दिल्ली।

गुजरात का विकास इस कदर पूरे देश के लोगों पर हावी था, की २०१४ में नरेंद्र मोदी को पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बना दिया। यही नहीं उनकी अगुवाई में भाजपा हर चुनावों में राज्य दर राज्य जीतती रही औऱ सरकार बनाती गई। आज अप्रैल२०१८ में हालात यह है, की भाजपा, देश की ६१ प्रतिशत जनता पर शासन कर रही है।

लेकिन इस दौरान, मोदी विरोधी ताकतों का एकजुट होना औऱ भी मजबूती से जारी है। इन मोदी विरोधी ताकतों को, कुछ बल तो भाजपा के अपने नेताओं औऱ कार्यकर्ताओं की करतूतों से भी मिलता है। कुछ मोदी सरकार की अपनी गलतियों की वजहों से भी मोदी विरोधी लोगों औऱ विरोध करने का मौक़े मिलते है।

किसी का समर्थन करने से ज़्यादा आसान औऱ आकर्षक होता है उसका विरोध करना। मोदी विरोधी ताकतें इस मनोविज्ञान को बहुत अच्छी तरह समझती हैं। यही नहीं, उसका बखूबी इस्तेमाल भी करती है।

जनसमुदाय कि सहानुभूति हमेशा कमजोर के प्रति होती है। किसी अनहोनी को सरकार के मत्थे मढ़ना प्रसार माध्यमों को बख़ूबी आता है। ऐसे में मोदी विरोधी ताकतों को प्रसार माध्यमों का साथ मिले तो किसी भी अनहोनी को सरकारी नाकामि साबित करना बड़ा आसान हो जाता है। औऱ आम जनता हमेशा अपने आप को पीड़ित के साथ ही रखेगी। ऐसे में अगर कठुआ औऱ उन्नाव,उत्तरप्रदेश के बलात्कारी गुनाहगारों के खिलाफ देश की जनता का आक्रोश लाज़मी है।

मोदी विरोधी ताकतों की, औऱ उनके प्रसार माध्यमों का भरसक प्रयास इस आक्रोश को २०१९ के चुनावों में अपने वोटों में तब्दील करने का ही रहेगा। नरेंद्र मोदी औऱ भाजपा सरकार को ऐसी किसी भी अनहोनी को सिर्फ़ कानून व्यवस्था को मजबूती से लागू करके दोषियों को फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के जरिए सज़ा दिलवाकर पीड़ितों को न्याय दिलाने में फुर्ती दिखानी चाहिए।

अग़र उनके अपने लोग किसी भी मामलों में सामने आए भी तो, उनपर तुरतफुरत कार्यवाही करें अन्यथा लोगों में इस कदर रोष बढ़ता जाएगा। कि २०१९ में यह आक्रोश मोदी विरोधी न बन जाए। नरेंद्र मोदी औऱ उनकी टीम को प्रोएक्टिव बनना होगा। एवं इन सारे क्राइम करने वालों के खिलाफ सख्ती से काम करके यह साबित करना होगा की लोगों को इंसाफ मिलना स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

अन्यथा नरेंद्र मोदी के २०१९ औऱ २०२४ में चुनाव जीतने औऱ प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी सिर्फ़ भविष्यवाणी ही बनी रहेगी।

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