कांग्रेस का ये कैसा उपवास है? क्या जनता का उपहास है?

दलितों पर अत्याचार के विरोध में कांग्रेस का ये कैसा उपवास है?

कांग्रेस का ये कैसा उपवास है, ये इस वक़्त का सबसे अहम सवाल है। क्योंकि देश एक बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। कई समस्याएं हैं जो देश के सामने अपना मुंह फाड़े खड़ी है। ऐसे में कांग्रेस रचनात्मक तरीकों से ईन समस्याओं को हल करने में अपना योगदान देने के बजाए, समस्याओं को अनदेखा करके अपना उल्लू सीधा करने में लगी हुई है।
कांग्रेस का ये कैसा उपवास है? क्या ये दलितों पर अत्याचारों का विरोध है, या भारत की जनता का उपहास है?

ये सच है कि दलितों पर अत्याचार अभी भी रुके नहीं है। ये भी सच है कि बीस करोड़ दलितों को सारी राजनीतिक पार्टियां केवल वोट बैंक के रूप में ज्यादा देखती है। इसलिए आए दिन दलितों के पक्ष में अपने आप को दिखाने के चक्कर में सारी पार्टियां दिन रात लगी रहती हैं। लेकिन कांग्रेस ने तो इसबार हद्द कर दी। भाजपा सरकार की दलित विरोधी नीतियों के विरोध में कांग्रेस का ये कैसा उपवास है? जिसमें कई मुख्य नेता जो प्रतीक उपवास पर बैठने वाले थे, उनकी छोले भटूरे खाते वक़्त की तस्वीर वायरल हुई जा रही है।

दुनिया की सबसे बड़ी लोकशाही आज भी उतनी ही मजबूती से इसीलिए टिकी हुई है कि उपवास औऱ सत्याग्रह जैसे महात्मा गांधी के दिये हुए हथियार सभी को उपलब्ध हैं। औऱ उपवास औऱ सत्याग्रह आज भी उतना कारगर है जितना बापू के समय में था।

तो फ़िर कांग्रेस ने इस हथियार का गलत इस्तेमाल क्यों किया? जैसे कि बताया जाता है, राहुल गांधी सिर्फ़ कुछ घंटों के प्रतीक उपवास पर बैठ कर सरकार की दलितों के प्रति उपेक्षा का विरोध जताने वाले हैं। तो फ़िर उनके साथ प्रतीक उपवास पर बैठे नेतागण उपवास पर बैठने से पहले की ली हुई तसवीर में मेजबानी करते हुए नजर आ रहे हैं।

अगर यह तसवीर ठीक उपवास पर बैठने से पहले की ही है, जो कि लग रही है कि उसी समय की है, क्योंकि एक, ये तसवीर उपवास के दौरान ट्वीट की गई, दूसरे, नेताओं के कपड़े वही है जो उपवास के मंच पर बैठे वक़्त के है। तो यह तो सरासर भारत की जनता का उपहास है।

क्योंकि जो पार्टी दलितों की पीड़ा बांटने के लिए प्रतीकात्मक ही सही, कुछ घंटों की भूख की पीड़ा सह नही सकती, उस कांग्रेस पार्टी को कैसे दलितों का हमदर्द माना जाए? दूसरे, हिंदुस्तान में सबसे लंबे समय तक शासन में कांग्रेस ही थी। क्या दलितों पर कांग्रेस के शासनकाल में अत्याचार कभी नहीं हुए?

औऱ, सिर्फ़ दलितों पर अत्याचार का विरोध क्यों? सारे देश में किसी भी जाति, किसी भी धर्म के किसी भी इंसान पर अग़र अत्याचार हो, तो उसका विरोध क्यों नहीं? क्यों अत्याचार का विरोध भी जाति और धर्म के आधार पर किया जाता है?

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अग़र महिलाओं को पिट दे, तो क्या ये कांग्रेस को स्वीकार्य है? जिग्नेश मेवानी अग़र पुलिस को अपना काम करने कि वजह से किसी भी तरह व्यवहार करें तो उसका विरोध क्यों नहीं? अग़र पूरे भारत को अपनी मर्ज़ी से बंद करवाकर लोगों के मकान औऱ गाड़ियां जलाए तो उनका विरोध क्यों नहीं? अपने विरोध प्रदर्शन में एम्बुलेंस को न जाने दे औऱ एक मासूम अपनी जिंदगी खो बैठे तो उसका विरोध क्यों नहीं?

देश में इसवक्त कितने ही मुद्दे चर्चा के लिए अहम है। बैंकों के घोटालों में जो भी पैसा गया है वो भारत की जनता का है किसी पार्टी का नहीं। औऱ ये घोटाले क्या आनन फानन में हो गए हैं? या मोदी सरकार के आते ही बैंको में लूट शुरू हो गई थी?

कांग्रेस को यह समझना होगा कि जनता को समझ आता है कि असली हमदर्द है या ये सब दिखावा है। अगर आप उपवास पर बैठने वाले हैं तो आपसे यह अपेक्षित है कि आप भूखे पेट उपवास पर बैठें। लेकिन आप सारे देश के सामने उपवास पर बैठने से पहले छोले भटूरे खाते दिखाई देते हैं, तो यह तो बड़ा भारी मज़ाक ही नहीं, भारत की जनता का उपहास करते हैं।

औऱ अगर आप सरकार बनाना चाहते हैं तो आपका एक एक एक्शन, भारत के हर एक नागरिक के उद्धार के लिए होना चाहिए। अगर किसी एक वर्ग को लेकर ही आप चिंतित है, तो बाकी सबकी सुध कौन लेगा? औऱ आपके सामने बहुत मजबूत कंपीटिशन है।

कांग्रेस को पूरे देश को ये बताना होगा कि कांग्रेस का ये कैसा उपवास है? छोले भटूरे खाकर उपवास पर बैठने पर, कांग्रेस को सफ़ाई देनी होगी। इसके साथ ही कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि उनके पास क्या ऐसे सुझाव है जो दलितों पर होने वाले अत्याचारों को जड़ से खत्म करने में सक्षम हो सकते हैं।

वरना जनता तो पूछेगी, कांग्रेस का ये कैसा उपवास है।

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